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हम धरती में 40,000 फीट से ज्यादा गहरा गड्ढा क्यों नहीं खोदते? आप भी जानिए

रूस में एक ऐसी जगह है जिसे नर्क का द्वार भी कहा जाता है। ये दुनिया में मौजूद सबसे गहरा बोरहोल है। कोला सुपरडीप बोरहोल नाम के इस होल को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने खोदना शुरू किया था। अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देने के लिए वे ज्यादा से ज्यादा गहरा खोदना चाहते थे लगातार 19 साल खोदने के बाद साइंटिस्ट 12 किमी गहराई तक पहुंच चुके थे लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें खुदाई को रोकना पड़ा।
आखिर क्या हुआ था ऐसा ?
हम सभी को पता हैं कि वैज्ञानिक लाखों-करोड़ों किलोमीटर दूर स्थित ग्रहों , उपग्रहों के बारे में जितना अधिक जानते हैं उसकी तुलना में पृथ्वी के बारे में वे कुछ भी नहीं जानते । हम आज तक पृथ्वी के लगभग कुछ ही हिस्से का ( लगभग 10 % ) का ही सही से अध्ययन कर पाए हैं। बाकी 90% हिस्से से हम आज भी अनजान हैं।
हम सिर्फ पृथ्वी के सतह के बारे में ही जानते हैं बाकी सतह के अंदर क्या है ? किसी को कुछ नहीं पता । यह जानने के लिए कि पृथ्वी के अंदर क्या है 1970 में रूस में एक गड्ढा खोदा गया जिसका नाम था ' कोला सुपरडीप बोरहोल ' । जिसे लगातार सिर्फ 12,262 मीटर तक ही खोदा जा सका। उसके बाद 1994 में इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया और इस गड्ढे को सील कर दिया गया।
  1. इसके बंद होने का प्रमुख कारण था ज्यादा तापमान होना। पृथ्वी के इस हिस्से का तापमान था लगभग 180 डिग्री सेल्सियस। जो वैज्ञानिक की सोच से कहीं अधिक था । वैज्ञानिकों का मानना था कि पृथ्वी के इतनी अंदर जाने पर तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं होगा। क्योंकि इतने अधिक तापमान पर काम करना आसान नहीं होता इसलिए इस प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा।
  2. दूसरा कारण था कि जितना अधिक हम पृथ्वी के अंदर जाएंगे उसका घनत्व उतना ही बढ़ता जाएगा।और इतने अधिक घनत्व में गड्ढा खोदने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा चाहिए और उतना ही ज्यादा पैसा। जिसके कारण इसे बंद कर दिया गया।
हालांकि इस गड्ढे से पृथ्वी की बहुत सी रहस्यमई चीजों के बारे में पता चला था। जिसके बारे में वहां के वैज्ञानिकों ने कभी खुलकर नहीं बताया। फिर भी इन सब के बावजूद भी धरती के अंदर इतने रहस्य छुपे हुए हैं जिन्हें आज तक हम नहीं जान पाए हैं।
इस मशीन से हुई खुदाई

इस अनोखे काम को पूरा करने के लिए दुनिया की सबसे अनोखी मशीन Uralmash का इस्तेमाल किया गया। मल्टी लेयर ड्रिलिंग सिस्ट वाली इस मशीन की टारगेट डेप्थ 15000 मीटर (49000 फीट) थी।
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