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21 जून को लगने वाला है वलयाकार सूर्य ग्रहण, जाने क्या होंगी घटनाए

दुनियाभर में दहशत का पर्याय बन चुका कोरोना पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को भी अपने आगोश में ले लेता है। ग्रहण अवधि तक होम क्वारंटाइन के बाद सूर्य को कोरोना से आजादी मिलती है। मगर ये कोरोना सूर्य को कोई हानि नहीं पहुंचाता, बल्कि उसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है।
असल में कोरोना एक रिंगनुमा गोल आकृति है। जब पूरा सूर्य चांद के पीछे छिप जाता है तो आकार में बड़ा होने की वजह से इसकी बाहरी परत से चारों ओर बाहर निकलती ज्वाला चंद्रमा के चारों ओर गोल आकृति में नजर आती है। इसे खगोलविज्ञान की भाषा में 'कोरोना' कहा जाता है।
21 जून को लगने वाले वलयाकार सूर्य ग्रहण के दौरान इस खगोलीय घटना को नहीं देखा जा सकेगा। क्योंकि ये केवल पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान ही नजर आता है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वलयाकार सूर्य ग्रहण को भूलकर भी नंगी आंखों से देखने का प्रयास न करें। नहीं तो आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चले जाने का खतरा रहता है।
उन्होंने बताया कि धरती से सूर्य की दूरी 15 करोड़ किलोमीटर है। वहीं चंद्रमा तीन लाख 84 हजार किलोमीटर दूर है। एक सूर्य के अंदर 64.3 मिलियन चंद्रमा समा सकते हैं। खगोलविद ने बताया कि चंद्रमा 29 दिनों के अंदर पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है। वहीं पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर 365 दिन 06 घंटा 48 मिनट और 45.51 सेकेंड में पूरा करती है।
सूर्य ग्रहण के वक्त चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाने के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजर रहा होता है। इस दौरान जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं, तब ये घटना होती है। इस खगोलीय घटना को भारत के अलावा इंडोनेशिया, पाकिस्तान, जापान, अफ्रीका, दक्षिण पूर्वी यूरोप, मध्य पूर्व एशिया, दक्षिणी चीन, इराक, चीन, सउदी अरब, अफगानिस्तान समेत अन्य देखों से देखा जा सकेगा।
इनकी मदद से देख सकते हैं सूर्य ग्रहण
खगोलविद ने बताया कि सूर्य ग्रहण को देखने के लिए सोलर चश्मा, टेलीस्कोप, पिन होल कैमरा, सूर्यग्रहण प्रोजेक्टर, सोलर दूरबीन की मदद से देख सकते हैं।
21 जून को सूर्य ग्रहण का समय
9:15 बजे सुबह- ग्रहण की शुरूआत
12:10- अधिकतम ग्रहण
3:04- आंशिक ग्रहण समाप्त
चार प्रकार के सूर्य ग्रहण
पूर्ण ग्रहण- जब चंद्रमा की छाया पूरी तरह से सूूर्य पर पड़ती है तो पूर्ण सूर्य ग्रहण लगता।
आंशिक ग्रहण -जब चंद्रमा की छाया सूर्य को आंशिक रूप से ढक लेती है।
वलयाकार सूर्य ग्रहण- जब सूर्य के मध्य से चंद्रमा की छाया गुजरती है तो उसके चारों तरफ एक चमकीला गोल घेरा बन जाता है, जिसे वलयाकार सूर्य ग्रहण।
हाइब्रिड सूर्य ग्रहण- दुर्लभतम खगोलीय घटना मानी जाती है। जो पूर्ण सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण का मिश्रण होती है।
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