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संकष्टी चतुर्थी आज : जानें पूजा विधि और क्या करें और क्या नहीं

ये है संकट को हरने वाली चतुर्थी...
संकष्टी चतुर्थी हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को अन्य सभी देवी-देवतों में प्रथम पूजनीय माना गया है। इन्हें बुद्धि, बल और विवेक का देवता का दर्जा प्राप्त है।
ऐसे में आज यानि  19  जून 2020, सोमवार को संकष्टी चतुर्थी है। ये दिन भगवान गणेश जी को समर्पित है, माना जाता है कि जिन लोगों पर भगवान गणेश जी की कृपा होती है उनके जीवन में सदैव ही सुख समृद्धि सदैव बनी रहती है। कष्ट ऐसे लोगों से दूर ही रहते हैं।
क्योंकि मान्यता है कि भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को हर लेते हैं इसीलिए इन्हें विघ्नहर्ता और संकटमोचन भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए कई व्रत-उपवास आदि किए जाते हैं, इनमें से भगवान गणेश के लिए किए जाने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत भी काफ़ी प्रचलित है।
ऐसे समझें संकष्टी चतुर्थी को...
संकष्टी चतुर्थी का मतलब होता है संकट को हरने वाली चतुर्थी। संकष्टी संस्कृत भाषा से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'कठिन समय से मुक्ति पाना'।
इस दिन व्यक्ति अपने दुःखों से छुटकारा पाने के लिए गणपति की अराधना करता है। पुराणों के अनुसार चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना बहुत फलदायी होता है। इस दिन लोग सूर्योदय के समय से लेकर चन्द्रमा उदय होने के समय तक उपवास रखते हैं। संकष्टी चतुर्थी को पूरे विधि-विधान से गणपति की पूजा-पाठ की जाती है।
जानें आज चंद्रोदय का समय...
संकष्टी चतुर्थी की तिथि सोमवार को है। इस दिन चंद्रोदय के बाद संकष्टी की पूजा का विधान है। 8 जून को 21 बजकर 56 मिनट पर चंद्रोदय होगा।
संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं। पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, वहीं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।
संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना करने के लिए विशेष दिन माना गया है। शास्त्रों के अनुसार माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी बहुत शुभ होती है। यह दिन भारत के उत्तरी और दक्षिणी राज्यों में ज्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान...
संकष्टी चतुर्थी का व्रत कठिन व्रतों में से एक है। मान्यता है कि इस व्रत में केवल फल, जड़ यानि जमीन के अन्दर पौधों का भाग का ही सेवन करना चाहिए, तभी इस व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।
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