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सामने आई राम मन्दिर की पहली ईट, बनी हुई है प्योर चाँदी से और वजन है 22 किलो 600 ग्राम, इसी ईट को रखेंगे मोदी जी....

तस्वीर को फैजाबाद के भाजपा सांसद लल्लू सिंह ने ट्वीट किया है। इस ईंट का वजन 22 किलो 600 ग्राम है। लल्लू सिंह ने चांदी की ईंट की तस्वीर को साझा करते हुए लिखा कि यह मेरा सौभाग्य रहेगा कि इस पवित्र ईंट को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्थापित किए जाने के समय मुझे प्रांगण में उपस्थित होने का सौभाग्य प्राप्त होगा। 


उधर, राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंदिर के निर्माण स्थल के नीचे टाइम कैप्सूल रखे जाने की खबर को अफवाह बताया है जबकि रविवार को ही ट्रस्ट के सदस्य ने निर्माण स्थल के करीब 200 फीट नीचे टाइम कैप्सूल को रखने की बात मीडिया से बताई थी। हालांकि, ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने टाइम कैप्सूल रखे जाने की घोषणा की थी। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व सदस्य कामेश्वर चौपाल के बयानों में भिन्नता से यह मालूम पड़ता है कि सदस्यों में तालमेल नहीं है। एक दूसरे के बयानों का खंडन किया जा रहा है। राम जन्म भूमि की नीव में एक ताम्रपत्र रखा जाएगा, जिसमें राम जन्म भूमि का संक्षिप्त इतिहास व शिलान्यास का ब्यौरा लिखा जाएगा। इसी ताम्रपत्र को टाइम कैप्सूल मान लिया गया।


हालांकि ऐसा नहीं है कि टाइम कैप्सूल को जमीन के भीतर रखने का यह पहला मामला होगा। भारत के इतिहास में ऐसा पहले भी हो चुका है। भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ऐसा कर चुकी हैं। जेएनयू के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने एक तस्वीर ट्वीट कर यह जानकारी दी। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त, 1973 को लालकिले के पास एक टाइम कैप्सूल जमीन में दबाया था। हालांकि यह पता नहीं चल सका है कि उसमें क्या साक्ष्य थे और क्या जानकारियां थीं, जिसे सहेजा गया था।
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