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रोजी रोटी के लिए मनरेगा में मजदूरी कर रहा पूर्व भारतीय कप्तान, तोड़ रहा पत्थर, रोजी रोटी के लिए नही रहा कोई साधन

कोरोना वायरस के कारण आम जनता सहित खिलाड़ियों पर भी गहरा असर पड़ा है। राजेंद्र सिंह धामी भी इन्हीं में से एक हैं जिन्हें लाॅकडाउन के कारण खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अब अपना घर चलाने के लिए मनरेगा में काम कर रहे हैं। धामी भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रह चुके हैं और 2017 मे भारत-नेपाल-बांग्लादेश त्रिकोणीय व्हीलचेयर क्रिकेट सीरीज में भारत का नेतृत्व किया था।

बीएड और हिस्टी में मास्टर डिग्री कर चुके धामी ने एक मीडिया हाउस से बातचीत में कहा, लॉकडाउन से पहले मैं रुद्रपुर (उत्तराखंड) में क्रिकेट खेलने में रुचि रखने वाले व्हीलचेयर से चलने वाले बच्चों को क्रिकेट की कोचिंग देता था। लेकिन काम ठप होने के कारण मैं पिथौरागढ़ में अपने गांव रायकोट आ गया यहां मेरे माता-पिता रहते हैं। उन्होंने कहा, घर में बूढ़े माता-पिता, एक बहन और छोटा भाई है।



खिलाड़ी के मुताबिक भाई गुजरात में एक होटल में काम करता था, लॉकडाउन के कारण उसकी भी नौकरी चली गई जिस कारण मनरेगा योजना के तहत अपने गांव में काम करने का फैसला किया। उत्तराखंड व्हीलचेयर क्रिकेट टीम का नेतृत्व करते हुए मलेशिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे कई देशों का दौरा कर चुके धामी ने कहा कि सरकार से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली है।

धोमी ने कहा, कुछ लोग मेरी मदद के लिए आगे आए हैं जिनमें अभिनेता सोनू सूद भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, सोनू सूद ने उन्हें 11 हजार रुपए भेजे थे। रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में भी कुछ लोगों ने मदद की, लेकिन यह काफी नहीं था।
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