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60 वर्षीय बेटा अपनी 105 वर्षीय मां को बैंक ले गया , माँ को लेकर चला 4 किलोमीटर, लेकिन नहीं मिली पेंशन, फिर कहानी में आया ट्विस्ट, जानकर रह जाओगे दंग

जानकारी के अनुसार घटना सोमवार को गढ़वा जिले के रांका में हुई। ब्लॉक प्रशासन ने रांका में वनांचल ग्रामीण बैंक के बाहर कोरोना परीक्षण शिविर लगाया था। कथित तौर पर इस परीक्षा में नकारात्मक आने वालों को ही बैंक जाने की अनुमति दी जा रही थी। “जब मैं अपनी मां को बैंक में ले गया, तो कोरोना टेस्ट हो रहे थे। मैं अपनी माँ का परीक्षण नहीं करवा सका तो बैंक अधिकारियों ने हमें इमारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी।“ बेटे ने बताया


60 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर भुवन ने दावा किया कि जब वह अपनी 105 वर्षीय मां के लिए बैंक जाने के लिए कोई साधन नहीं खोज पाया तो उसने अपनी माँ को अपने कंधों पर बिठाया और कंचनपुर गाँव से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रांका ले गया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि वह बैंक तक पहुंच सकें और अपनी मां के जन धन खाते से पेंशन का पैसा निकाल सकें।


दरअसल बात यह है कि दिहाड़ी मजदूर की माँ के जन धन खाते में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 3 महीने की पेंशन की दी गई थी, जिसकी राशि 1,500 रुपये थी। लेकिन कोरोना परिक्षण ना करा पाने से दोनों को बैंक जाने की अनुमति नहीं मिली। इसलिए मजबूरी में दोनों को खाली हाथ लौटना पड़ा। जब स्थानीय मीडिया में भुवन और उसकी मां की तस्वीर सामने आई, तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गढ़वा जिले के डिप्टी कमिश्नर को बुजुर्ग महिला की मदद करने को कहा और यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वह भविष्य में किसी परेशानी का सामना न करें।

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