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7 माह बाद बरामद हुआ गढ़वाल रायफल्स के जवान का शव, बॉर्डर पर हिमस्खलन में हुए थे शहीद

राजेंद्र के परिजनों के अनुसार, सेना ने मई महीने में राजेंद्र सिंह की 'बैटल कैजुएलिटी' (युद्ध में शहीद) का ऐलान किया था. इस महीने के शुरू में उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राजेंद्र की पत्नी को सांत्वना संदेश भी पहुँचाया था. किन्तु राजेंद्र की पत्नी यह मानने को तैयार नहीं थीं कि उनके पति शहीद हो गए हैं, क्योंकि शव बरामद नहीं हुआ था. 

राजेंद्र सिंह ने साल 2001 में गढ़वाल रायफल्स जॉइन की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजेंद्र के चचेरे भाई और पूर्व फौजी दिनेश नेगी ने बताया कि राजेंद्र पिछली बार 2019 में दिवाली पर घर आए थे। जब वे वापस लौटे, तो उन्हें गुलमर्ग में एलओसी पर ड्यूटी मिली. इस वर्ष 9 जनवरी को सेना की तरफ से हमें सूचना मिली कि राजेंद्र एवलांच के दौरान कहीं गुम हो गए हैं.

दिनेश नेगी ने बताया कि, सेना ने तीन दिन तक बहुत तलाश किया, किन्तु राजेंद्र कहीं नहीं मिले, इसके बाद हमने उम्मीद छोड़ दी. सेना में ड्यूटी के दौरान मैंने सियाचीन में सेवा दी है, इसलिए मुझे पता है कि बर्फ में दबकर कोई दो दिन से अधिक जीवित नहीं रह सकता है. मैंने यह बात राजेंद्र के परिवार को भी बताई. किन्तु उनकी पत्नी राजेश्वरी इस बात को मानने को तैयार नहीं थीं क्योंकि शव बरामद नहीं हुआ था. राजेंद्र की तलाश तेज करने के लिए हम लोगों ने रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से भी आग्रह किया था. बता दें कि दिनेश नेगी 2015 में नायक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं.

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