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ऐसा थाना जहां पुलिस वाले ड्यूटी करने से कतराते हैं, आइए जाने ऐसा क्या है इस थाने में

तीन गांव की आबादी के कार्य क्षेत्र वाले इस थाने क्षेत्र में गंभीर अपराध होते ही नहीं है। यहां तक की चोरी भी इस इलाके में नहीं होती है। अपराध ना होने की वजह से यहां पर पीस कमेटी का गठन तक नहीं किया गया है।सिपाही गश्त पर भी नहीं जाते हैं। बैंक कोई है नहीं इस वजह से बैंक ड्यूटी का कॉलम सिर्फ जीडी में ही दर्ज है। अफसरों ने सख्ती की तो आठ महीने में 43 मामले दर्ज किए गए वह भी आबकारी एक्ट के, इसके अलावा एक एनसीआर तक नहीं दर्ज करनी पड़ी। हालांकि जंगल इलाका होने की वजह से यहां पर पर्याप्त फोर्स की पोस्टिंग है।

उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा पर जंगल के डकैतों के आतंक को खत्म करने के लिए शासन के आदेश पर 2003 में थाने की स्थापना की गई थी। थाने में एक सब इंस्पेक्टर, एक एसआई, आठ सिपाही ही तैनात थे। हालांकि यह संख्या अक्सर अचानक बढ़ जाती है, क्योंकि जब अफसर नाराज होते हैं तो इसी थाने पर पोस्टिंग करते हैं। पुलिस वालों के लिए यहां पर तैनाती काला पानी की सजा से कम नहीं है।

 थाने की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि थाने पर यदि कोई अफसर जाना चाहे तो उसके लिए स्कोर्ट को असलहा जमा करना पड़ता है। थाने पर पहुंचने के लिए कुशीनगर के खड्डा से होते हुए बिहार के पश्चिमी चंपारण के नौरंगिया से होकर जाना पड़ता है। नेपाल के रास्ते जाने के लिए एसपी के स्कोर्ट को निचलौल के झुलनीपुर पुलिस चौकी पर असलहा जमा करना पड़ता है। बाढ़ आने पर चारों ओर से थाना पानी से घिर जाता है। सीधे महराजगंज आने का कोई रास्ता नहीं है। नदी में नाव के सहारे ही सीधे आया जा सकता है या फिर बिहार, नेपाल से होकर आना पड़ता है।


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