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फांसी देने से पहले कैदी के कान में क्या कहता है जल्लाद? जिसे सुनकर थर थर कांपने लगते है कैदी,जानकर हैरान रह जाएंगे

फांसी की सजा को इतना खतरनाक माना जाता है कि लोग इससे जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में बात ही करना नहीं चाहते है। मगर हम आपको बता दे कि अंग्रेजों के जमाने से ही फांसी के लिए भी कुछ नियम कायदे बनाए गए थे। जैसे कि फांसी का फंदा, फांसी देने का समय, फांसी की प्रकिया आदि पहले से ही तय होते हैं। जल्लाद एक सरकारी मुलाजिम होता है जो दिल पर पत्थर रखकर यह काम करता है।


यही वजह है कि फांसी देने के कुछ देर पहले वह अपराधी के कान में यह कहता है कि भाई मुझे माफ कर देना, मैं तो एक सरकारी कर्मचारी हूं। कानून के हाथों मजबूर हूं। इसके बाद अगर मुजरिम हिंदू है तो वह उसे राम राम बोलता है। वही अगर मुस्लिम है तो वह उसे आखिरी दफा सलाम करता है। साथ ही जल्लाद कहता है कि मैं तो सरकार के हुक्म का गुलाम हूं, इसलिए जानबूझकर तुम्हें मौत नहीं दे रहा हूं।

बस इतना कहते ही वह फांसी का फंदा खींच देता है। इसके बाद थोड़ी देर में मेडिकल टीम उस शव का मुआयना कर लेती है। इस तरह जल्लाद अपराधी के कान में ये बातें कहकर अपने आप को अपराध बोध से बचाने का काम करता है। बता दे कि जल्लाद की नौकरी बहुत ही हिम्मत का काम है। यही वजह है कि आजकल सरकार को इस पद पर बहुत ही कम आदमी मिल पाते हैं। तो दोस्तों कैसी लगी आपको फांसी के दौरान की यह प्रक्रिया, हमें जरूर बताएं।

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