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सूर्यदेव का अनोखा मंदिर जिसके आगे बाबर भी हो गया था नत मस्तक, वजह जानकर रह जाओगे दंग.....

प्राचीन काल से हमारे देश में पूजा-स्थलों का बड़ा ही विशेष महत्व हैं। कई मंदिर ऐसे हैं, जिनकी चमत्कारी शक्तियो के किस्से इतिहास के पन्नो में आज भी दर्ज हैं। हम आपको आज ऐसे ही एक अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं।

इस मंदिर का महिमामंडन सुनकर आप भाव अभिभूत हो जाएंगे। यह विशिष्ट सूर्य मंदिर बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित है। कहा जाता है कि इसे त्रेता युग में स्थापित किया गया था। जी हां, हम बात कर रहे हैं विख्यात सूर्य मंदिर की जिसे पश्चिमाभिमुख सूर्य मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर अपनी नायाब बनावट और विशिष्ट स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। इस मंदिर के साथ एक अनोखा रहस्य भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस सूर्य मंदिर का मुख एक ही रात में पूरब से पश्चिम की ओर घूम गया था।जी हां, मुगल बादशाह बाबर जब इसे तोड़ने आया था तो पुजारियों ने उससे याचना की। इस पर बाबर ने उन्हें हंसकर कहा कि अगर यह मंदिर कल तक अपना रुख पश्चिम की ओर कर ले तो वो यह मंदिर नहीं तोड़ेगा।

करिश्मा देखिए कि अगले दिन मंदिर का मुख बदल कर पश्चिम की तरफ हो गया था। बाबर ने भी इस मंदिर के आगे हाथ जोड़कर क्षमा याचना मांगी और बिना तोड़े लौट गया। ऐसा माना जाता है इस मंदिर का निर्माण देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं अपने हाथों से किया है। डेढ़ लाख वर्ष पुराना यह सूर्य मंदिर काले और भूरे पत्थरों की अद्भुत कारीगरी का नायाब नमूना है।

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