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जिस महिला की लाश गाजियाबाद में सूटकेस से मिली थी, वो अलीगढ़ में मिली जिंदा, फिर सामने आई ऐसी सच्चाई पुलिस के उड़ गए होश.....

पुलिस ने 28 जुलाई को उसकी शिनाख्त बरीशा पुत्री जफर अली निवाली अलीगढ़ और ससुराल बुलंदशहर के इस्लामाबद के तौर पर की थी। इस मामले में पुलिस ने ससुराल पक्ष के लोगों को जेल भेज दिया था। वहीं, अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। दरअसल, गाजियाबाद पुलिस ने जिस महिला की शिनाख्त की थी वो जिंदा निकल आई है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरीशा ने जब अखबारों में अपने मरने की खबर सुनी तो वह अलीगढ़ के गांधी पार्क स्थित थाने में पहुंच गई।

उसने पुलिस को बताया कि बुलंदशहर के इस्लामाबाद निवासी आरिफ से उसकी शादी एक जून को हुआ थी। एक जुलाई को वह अपने मायके आई थी। 17 जुलाई को मायके से फिर ससुराल में आ गई। इस दौरान सास जमीला, पति आरिफ और ससुर मुस्लिम ने उसके जेवरात चोरी कर लिए और चोरी का आरोप उसके मायके पक्ष पर लगा दिया। जिसके बाद 22 जुलाई की रात उसे पीटा गया। बरीशा को लगा कि उसकी हत्या की जा सकती है। इसलिए वह 23 जुलाई की सुबह अपने घर से निकलकर नोएडा एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी में काम करने लगी। रविवार को बरीशा को पता चला कि उसे परिजनों ने मरा हुआ समझ लिया है। जिसके बाद वह मायके पहुंची और फिर गांधी पार्क थाने।बरीशा के सामने आने के बाद अलीगढ़ पुलिस ने इसकी जानकारी बुलंदशहर पुलिस को दी। बुलंदशहर पुलिस अलीगढ़ पहुंची और महिला को बरामद करके ले आई। वहीं, बुलंदशहर के एसएसपी संतोष कुमार सिंह मीडिया को जानकारी देते हुए इसे बारे में बताया कि बरीशा जिंदा है।

फोटो, आधार कार्ड आदि सभी से मिलान किया जा चुका है। इसलिए बरीशा के भाई ने जो मुकदमा दर्ज कराया है। उसमें से दहेज हत्या की धारा हटाई जाएगी, लेकिन बरीशा का दहेज के लिए उत्पीडऩ हुआ है। यह धारा मुकदमे से नहीं हटेगी।बुलंदशहर पुलिस को जैसे ही इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने गाजियाबाद पुलिस को सूचना दी। गाजियाबाद पुलिस पहले ही इस मामले में 24 घंटे में शव की शिनाख्त कर अपनी पीठ ठोक चुकी थी। सूचना मिलते ही पुलिस में हड़कंप मच गया। शाम तक पुलिस ने अपनी सफाई में कई तथ्य जारी किए। पुलिस का दावा है कि वारीशा के भाई इस्माईल और मां बूंदो ने शव की शिनाख्त की थी।
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