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भारत के इस किले पर अंग्रेजों ने टेक दिए थे घुटने नहीं गिरा पाए इसे गोला बारूद से भी, वजह है काफी हैरान कर देने वाली

लोहागढ़ किला भारत के राजस्थान में भरतपुर में स्थित है। इसका निर्माण भरतपुर जाट शासकों द्वारा किया गया था। महाराजा सूरज मल ने अपने राज्य भर में कई किले और महल बनवाए, उनमें से एक लोहागढ़ किला है, जो भारतीय इतिहास में अब तक का सबसे मजबूत किला है।

यह भरतपुर का लोहागढ़ किला जिसे आर्यन फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है| इसे लोहे जैसा मजबूत दुर्ग को भरतपुर के जाट शासक सूरजमल ने बनवाया था|


इस किले में जो भी शासक आया उसे कोई हरा न पाया| इस किले पर तोप के गोलों का भी असर नहीं होता था| इस किले में जाट राजा शासन करते थे | उन्होंने इसे इतनी कुशलता के साथ डिजाइन किया था कि दूसरे राजा इन पर हमला कर दे तो उनकी सारी कोशिशें नाकाम हो जाए|


किले की दीवारें मिट्टी से ढकी थी, जिससे दुश्मनों की तोप के गोले इस मिट्टी में धंस जाते थे| यही हाल बंदूक की गोलियों का भी होता था| इसलिए जाट राजाओं के बारे में यह फेमस हो गया था कि जाट राजा मिट्टी से भी सुरक्षा के उपाय निकाल लेते थे |


इस किले के चारों तरफ जाट राजाओं ने सुरक्षा के लिहाज से एक खाई बनवाई थी , जिसमें पानी भर दिया गया था| इतना ही नहीं कोई दुश्मन तैरकर भी किले तक न पहुंचे इसलिए इस पानी में मगरमच्छ छोड़े गए थे |
अंग्रेजों ने इस दुर्ग की चार बार घेराबंदी की है लेकिन उन्हें चारों बार मुंह की खानी पड़ी और घेरा वापस लेना पड़ा|

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