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मोदी सरकार की इन विश्वविद्यालयों पर टेढ़ी नजर, चीन से मिल रहे फंड की होगी जांच

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने शिक्षा मंत्रालय उच्च शिक्षा में कन्फ्यूशियस संस्थानों के कारण चीन के बढ़ते हुए प्रभाव को देखते हुए अलर्ट किया है। जिसके बाद भारत सरकार द्वारा 7 कॉलेज और विश्वविद्यालयों की समीक्षा करने जा रही है। शिक्षा मंत्रालय ने जेएनयू, एनआईटी, बीएचयू, आईआईटी और चीनी संस्थानों समेत इन प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों के बीच हस्ताक्षरित हुए 54 समझौता ज्ञापनों (MOU) की समीक्षा करने जा रही हैं।
इसे लेकर पहले ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और विदेश मंत्रालय को एक अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। चीनी भाषा और चीनी संस्कृति को बढ़ावा देने के मकसद से चीनी शिक्षा मंत्रालय द्वारा 
कन्फ्यूशियस संस्थानों को फंड दिया जाता है। लेकिन अब सिकी ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देश इनकी आलोचना कर रहे हैं उनका कहना है कि यह सब चीन अपना प्रचार प्रसार करने के लिए कर रहा है। बीबीसी की वर्ष 2019 (सितंबर) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया द्वारा 'क्या विश्वविद्यालयों और संस्थान के बीच हुए समझौतों ने विदेशी-हस्तक्षेप कानूनों को तोड़ा है' की जांच प्रारम्भ की। इस ही रिपोर्ट में बताया गया कि विश्व के कई विश्वविद्यालयों ने संस्थान द्वारा चल रहे कार्यक्रमों को बंद कर दिया।
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