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मोस्ट वॉन्टेड दाऊद इब्राहिम को खत्म करना चाहती है पाकिस्तान आर्मी,वजह जानकर रह जाओगे दंग

पाकिस्तान को अगर दिवालिया होने से बचना है तो एफएटीएफ की हर शर्त पूरी करनी होगी। क्योंकि, इसके बिना वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ या एशियन डेपलपमेंट बैंक उसे कर्ज नहीं देंगे। वो जुलाई 2018 से ग्रे लिस्ट में है। आतंकियों पर सबूतों के साथ सख्त और निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई तो अक्टूबर में ब्लैक लिस्ट होने का खतरा सिर पर है। अब दाऊद पर भी फैसला करना ही होगा। क्योंकि, इमरान सरकार मान चुकी है कि दाऊद कराची में है। भारत दुनिया को इसके अनगिनत सबूत कई सालों से दे रहा था।

1980 की शुरुआत में ही पाकिस्तानी फौज ने ड्रग तस्करी को कमाई का जरिया बनाया। अफगानिस्तान से अफीम और हेरोइन लाए जाते। फौज दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क के जरिए इनकी इंटरनेशनल सप्लाई करती। यानी ड्रग सप्लाई दाऊद के गुर्गे करते। करोड़ों डॉलर कमाई होती और फिर बंटवारा। फौज के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल फजल हक को खैबर पख्तून्ख्वा का गवर्नर बनाया ही इसलिए गया ताकि तस्करी में दिक्कत न हो।


कमाई का एक हिस्सा आतंकी तैयार करने और मदरसे बनाने पर खर्च हुआ। नेताओं, जजों, पत्रकारों को मोटी रकम दी जाती ताकि वे किसी भी हालत में मुंह न खोलें। यूरोप, मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में लाखों डॉलर से प्रापर्टीस खड़ी की गईं। 2015 में पाकिस्तानी मॉडल अयान अली इसी रैकेट की वजह से गिरफ्तार हुए था। 2012 में कस्टम ऑफिसर हबीब अहमद ने कहा था- पाकिस्तान से हर साल 2 हजार टन हेरोइन स्मगल की जाती है। अफगानिस्तान में हर साल 6 हजार टन अफीम पैदा होती है।

ड्रग्स की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के पास भी पहुंचता। इनमें यासीन मलिक, अली शाह गिलानी और कुछ दूसरे नाम शामिल थे। कश्मीर में हिंसा की आड़ लेकर तस्करी की जाती। इंडियन इंटेलिजेंस एजेंसीस और मुंबई पुलिस ने दाऊद के नेटवर्क को करीब-करीब खत्म कर दिया। 2003 में उसे ग्लोबल टेरेरिस्ट घोषित किया गया। अब पाकिस्तान ने जिन 88 आतंकियों पर दिखावे का एक्शन लिया है, उनमें दाऊद का नाम भी शामिल है।

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