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जिनपिंग की कुर्सी खतरे में, भारत से चीन का युद्ध 100% कन्फर्म हो गया, कुर्सी बचाने के लिए जिनपिंग के लिए WAR आखिरी रास्ता

अगर भारतीय सेना पैंगॉन्ग त्सो झील  के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटती तो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी पूरे ठंड के मौसम में वहीं जमी रहेगी। ऐसे में एक और बड़ी बात सामने आई है। अमेरिकी पत्रिका न्‍यूज वीक में चीन मामलों के स्‍तंभकार गॉर्डन जी चांग ने कहा कि भारत ने चीनी सेना को जोरदार पटखनी दी है और अब भारत को चीनी राष्ट्रपति के अगले कदम की ओर नजर रखना होगा।



गॉर्डन ने कहा कि चीन का क्रूर सफाई अभियान अब आने वाला है। शी जिनपिंग पहले ही 'सुधार' अभियान चला रहे हैं और अपने विरोधियों को दंडित करने में जुटे हुए हैं। हालांकि भारतीय सेना के जवाबी कार्रवाई के बाद अब शी जिनपिंग का भविष्‍य खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्‍होंने कहा कि लद्दाख में घुसपैठ की यह पूरी योजना शी जिनपिंग और उनकी सेना ने बनाई थी लेकिन यह बुरी तरह से फ्लाप रही है।

गॉर्डन ने कहा कि गलवान हिंसा में चीन के कम से कम 43 सैनिक मारे गए और यह दोनों के बीच पिछले 45 साल में सबसे घातक संघर्ष था। चीनी सैनिकों के मारे जाने की संख्‍या 60 तक हो सकती है।

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