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चीनी सेना ने लद्दाख 1,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कब्जे में लिया, भारतीय वायुसेना की बढ़ी हलचल

खुफिया सूचनाओं के मुताबिक मौजूदा तनाव के दौरान डेप्सांग प्लेन इलाके के पेट्रोलिंग प्वाइंट 10 से 13 तक लगभग 900 वर्ग किमी. का इलाका चीनी कब्जे में चला गया है। इसी तरह गलवान घाटी में लगभग 20 वर्ग किमी. और हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में 12 वर्ग किमी. क्षेत्र चीनी कब्जे में है। पैंगोंग त्सो में 65 वर्ग किमी. चीनी नियंत्रण में है, जब​​कि चुशुल में यह 20 वर्ग किलोमीटर है। इस डेप्सांग प्लेन में कुल पांच पेट्रोलिंग प्वाइंट (पीपी) 10, 11, 11ए, 12 और 13 हैं जहां चीनी सेना भारतीय सैनिकों को गश्त करने से लगातार रोक रही है।​ ​भारत चाहता है कि डेप्सांग के मैदानी इलाके से चीनी सेना वापस 12 किमी. अपनी सीमा में जाए और यहां एलएसी दोनों पक्षों के बीच व्यापक रूप से स्पष्ट हो। 

यह वही इलाका है जहां पर चीन की सेना ने 2013 में भी घुसपैठ की थी और दोनों देशों की सेनाएं 25 दिनों तक आमने-सामने रही थींं। अब सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीनियों ने यहां पर नए शिविर और वाहनों के लिए ट्रैक बनाए हैं जिसकी पुष्टि जमीनी ट्रैकिंग के जरिये भी हुई है। इसके अलावा बड़ी तादाद में सैनिक, गाड़ियां और स्पेशल एक्यूपमेंट इकठ्ठा किया है। भारत ने मई के अंत में ही भांप लिया था कि चीन अगली लामबंदी डेप्सांग में कर सकता है, इसीलिए भारतीय सैनिकों ने तभी से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी पुख्ता कर ली थी।

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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बीच एक बड़ा मुद्दा डेप्सांग घाटी इसलिए रहा है क्योंकि भारत ने अप्रैल 2013 में फेसऑफ के करीब चार महीने बाद वायुसेना ने डीबीओ में सालों से बंद पड़ी 16,614 फीट की ऊंचाई पर अपनी हवाई पट्टी को फिर से शुरू की थी।वायुसेना ने यहां अपने मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी-130जे सुपर हरक्यूलिस की लैंडिंग कराकर दुनिया की सबसे ऊंची हवाई पट्टी का खिताब हासिल किया था।


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