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ये है भारत का सबसे अनोखा मन्दिर, इस मन्दिर में 2 बजे से 5 बजे के बीच रुकने वाले की हो जाती है मौत, वजह जानकर रह जाओगे दंग

 मध्यप्रदेश में चित्रकूट के निकट सतना जिले के मैहर शहर में 600 फुट की ऊंचाई पर त्रिकुटा पहाड़ी पर मां दुर्गा के शारदीय रूप श्रद्धेय देवी माँ शारदा का मंदिर है, जो मैहर देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं !

इस प्रसिद्ध तीर्थ स्थल के सन्दर्भ में एक अन्य दन्तकथा यह भी प्रचलित है कि दो वीर भाई आल्हा और उदल, जिन्होंने पृथ्वीराज चौहान के साथ भी युद्ध किया था, वे भी शारदा माता के बड़े भक्त हुआ करते थे ! इन्हीं दोनों ने सबसे पहले जंगलों के बीच शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी ! इसके बाद आल्हा ने इस मंदिर में बारह साल तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था ! माता ने उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद दिया था !


कहते हैं कि आल्हा ने भक्ति-भाव से अपनी जीभ शारदा को अर्पण कर दी थी, जिसे माँ शारदा ने उसी क्षण वापस कर दिया था ! आल्हा माता को 'शारदा माई' कह कर पुकारा करता था और तभी से ये मंदिर भी 'माता शारदा माई' के नाम से प्रसिद्ध हो गया ! आज भी ये मान्यता है कि माता शारदा के दर्शन हर दिन सबसे पहले आल्हा ही करते हैं ! मंदिर के पीछे पहाड़ों के नीचे एक तालाब है, जिसे 'आल्हा तालाब' कहा जाता है ! यही नहीं तालाब से दो किलोमीटर और आगे जाने पर एक अखाड़ा मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहाँ आल्हा और उदल कुश्ती लड़ा करते थे !

मां शारदा के मंदिर को रात 2 से 5 बजे के बीच बंद कर दिया जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि इसी अवधि में आल्हा मां के दर्शन करने आते हैं। वह मां के दर्शन, पूजन के साथ ही उनका शृंगार भी करते हैं। इसलिए रात को 2 से 5 बजे के बीच यहां कोई नहीं ठहरता। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो हठपूर्वक यहां रुकने की कोशिश करता है, उसकी मौत हो सकती है।

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