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इस गाँव में नही है कोई भी मुसलमान फिर भी एक मस्जिद को 200 साल से सहेज कर रखा है हिन्दुओ ने, कारण जानेंगे तो उड़ जाएंगे होश

ग्राम या गांव छोटी-छोटी मानव बस्तियों को कहते हैं जिनकी जनसंख्या कुछ सौ से लेकर कुछ हजार के बीच होती है। प्राय: गांवों के लोग कृषि या कोई अन्य परम्परागत काम करते हैं। गांवों में घर प्राय: बहुत पास-पास व अव्यवस्थित होते हैं। परम्परागत रूप से गांवों में शहरों की अपेक्षा कम सुविधाएं  होती हैं।इसे संस्कृत में ग्राम, गुजराती में गाम पंजाबी में पिंड कहते हैं। 

आज हम आपको भारत के ऐसे सेकुलर गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ एक भी मुसलमान नहीं रहता है फिर भी गांव के लोगों ने पिछले 200 सालो से गांव में मौजूद एक मस्जिद को सहेज के रखा हुआ है। गांव के लोग मस्जिद की साफ़ सफाई और रंग रोशन का भी ध्यान रखते हैं। ये गांव बिहार के नालंदा जिले में मौजूद है।

नालंदा जिले के बेन प्रखंड का माड़ी गांव अपने आप में एक अलग मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ मौजूद इस मस्जिद का निर्माण मरहूम बदरे आलम साहब ने करवाया था। साल 1941-42 में सांप्रदायिक झगड़े के बाद इस गांव के मुसलमान यहाँ से चले गए थे। जिसके बाद से गांव के हिन्दुओ ने मस्जिद की देख रेख शुरू कर दी।
मस्जिद के बाहर एक मज़ार भी मौजूद है जिस पर गांव के लोग चादरपोशी करते हैं। ये मजार गांव के हिन्दुओ की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
हमारे देश का ये गांव पूरी दुनिया में एक अलग ही संदेश दे रहा है।

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