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पति पत्नी ना करें ये 5 गलतियां, वरना जीवन में आ सकते हैं भारी संकट

संतुष्टि
संतुष्टि यानी एक-दूसरे के साथ रहते हुए परिस्थिति और समय के मुताबिक जो भी सुख-सुविधाएं प्राप्त हो, उसी में संतोष करना चाहिये। दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बनें, दोनों एक-दूसरे से पूर्णतः संतुष्ट हो, कभी भी राम ने सीता में या सीता ने राम में कोई कमी नहीं देखी। दोनों एक-दूसरे के फैसले का सम्मान करते थे।

संतान


वैवाहिक जीवन में संतान का भी बड़ा महत्वपूर्ण स्थान होता है, पति-पत्नी के बीच संबंधों को मजबूत और मधुर बनाने में बच्चों की अहम भूमिका होती है। राम-सीता के बीच वनवास को खत्म करने, तथा सीता को पवित्र साबित करने में उनके बच्चे लव और कुश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

संवेदनशीलता
पति-पत्नी के रुप में एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और उसका सम्मान करना चाहिये, नहीं तो फिर छोटी-छोटी बातों पर वाद-विवाद होगा। राम और सीता के बीच संवेदनाओं का गहरा रिश्ता था। दोनों बिना कुछ कहे ही एक-दूसरे की बात को समझ लेते थे।

संकल्प
पति-पत्नी के रुप में अपने धर्म को अच्छी तरह से निभाने के लिये अपने कर्तव्य को संकल्पपूर्वक पूरा करना चाहिये। आपने विवाह करते समय एक-दूसरे से जो वादा किया है, उस संकल्प को पूरा करने के लिये काम करें, तभी आपका दांपत्य जीवन सुखमय हो पाएगा।

समर्पण
वैवाहिक जीवन में अगर पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति पूरी तरह से समर्पित नहीं हैं, तो फिर उनके जीवन में छोटे-मोटे विवाद होते रहेंगे, इसलिये पति-पत्नी के बीच एक-दूसरे के प्रति पूरा समर्पण और त्याग होना चाहिये। समझौता कर लेना दांपत्य जीवन को मधुर बनाये रखने के लिये सबसे जरुरी है।

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