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बड़ी खबर : कुर्सी बचाने के लिए किसी भी हद्द तक जा सकता है जिनपिंग, छिनेगी जिनपिंग की कुर्सी, मिली है सिर्फ 90 दिनों की मोहलत

चीन की कम्युनिस्ट सरकार के सबसे बड़े नेता को इस बात की पूरी-पूरी खबर है कि बदले हुए हालात में किसी भी वक्त उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है। यहां की आवाम के अंदर ही अदंर बगावत की ऐसी चिंगारी जल रही है, जो किसी भी वक्त बेलगाम विस्फोट बनकर जिनपिंग के सम्राज्य को धुआं-धुआं कर सकती है। ड्रैगन विद्रोह की इस चिंगारी को अपनी तानाशाही के तलवे के नीचे मसलने की भरपूर कोशिश कर रहा है। मगर अब बाजी जिनपिंग के हाथ से निकलती दिखाई दे रही है।




31 साल बाद चीन फिर बगावत की राह पर है। फर्क बस इतना है कि तब चीन पर तानाशाह यांगशांगकुन का कब्जा था और अब शी जिनपिंग की तानाशाही का दौर है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पर इसलिए भी जिनपिंग को सत्ता से बेदखल करने का दबाव है, क्योंकि कोरोना वायरस की पैदाइश और प्रसार में चीन की भूमिका की जांच शुरू हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि WHO से 137 देशों ने एकसाथ मांग की थी कि वुहान वायरस के प्रचार-प्रसार में चीन की भूमिका की जांच की जाए, जिसके बाद एक स्वतंत्र जांच दल बनाया गया। इस जांच दल की अगुवाई न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क और लाइबेरिया के पूर्व राष्ट्रपति एलेन जॉनसन सरलीफ कर रहे हैं। ये जांच दल नवंबर में अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगा।


चीन में कम्युनिस्टी पार्टी के शासन के तहत सिंगल पार्टी रूल है। ऐसे में सत्ता और शासन से जुड़े सारे फैसले लेने का अधिकार कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना यानी CPC को है। सीपीसी हर पांच साल में सेंट्रल कमिटी का चुनाव करती है। सेंट्रल कमिटी में शामिल करीब 200 लोग पोलित ब्यूरो का चयन करते हैं। इसके साथ ही स्थायी समिति का भी चयन किया जाता है। पोलित ब्यूरो और स्थायी समिति फैसला लेने वाली सबसे शक्तिशाली कमिटी है। ये दोनों मिलकर ही महासचिव का चुनाव करते हैं और CPC का महासचिव ही चीन का राष्ट्रपति बनता है।

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