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दुनिया का एकमात्र किला जहाँ लगता है भूतो का मेला, इसके पीछे की सच्चाई और रहस्य जानोगे तो निकल जाएगी आपकी जान...

भानगढ़ किले की कहानी-भानगढ़ किला 17 वी शताब्‍दी में सिंह के छोटे भाई माधो सिंह ने बनवाया था। 300 सालो तक भानगढ़ खूब फलता फूलता है। भानगढ़ कि एक सुन्दर राजकुमारी पर वंहा के काले जादू में महारथ तांत्रिक सिंधु सेवड़ा चाहने लगता है।



तांत्रिक सिंधु राजकुमारी को वश में करने लिए काला जादू करता था पर खुद ही अपने जादू का शिकार हो कर मर जाता है लेकिन मरने से पहले भानगढ़ को बर्बादी का श्राप दे जाता है और संयोग से उसके एक महीने बाद ही पड़ौसी राज्य अजबगढ़ से लड़ाई में राजकुमारी सहित सारे भानगढ़ वासी मारे जाते है और भानगढ़ वीरान हो जाता है। तब से वीरान हुआ भानगढ आज तक वीरान है और कहते है कि उस लड़ाई में मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते है।क्योकि तांत्रिक के श्राप के कारण उन सब लोगो कि मुक्ति नहीं हो पाई थी।

एएसआई ने सख्‍त हिदायत दे रखा है कि सूर्यास्‍त के बाद इस इलाके में किसी भी व्‍यक्ति के रूकने के लिए मना है। इस किले में जो भी सूर्यास्‍त के बाद गया वो कभी भी वापस नहीं आया है।कई बार लोगों को रूहों ने परेशान किया है और कुछ लोगों को अपने जान से हाथ धोना पड़ा है।

वेसे तो भानगढ़ किला पुरे सप्ताह खुला रहता है पर आप यंहा सुबह 6Am से लेकर साम 6pm तक रुक सकते है 6pm के बाद किले के अंदर आना मना है।

भानगढ़ किला (bhangarh fort ) जयपुर से 52 km की दुरी पर है आप जयपुर से बस पकड़ कर भानगढ़ किले में आसानी से पहुंच सकते है पर्यटन के लिहाज से यह एक ऐतिहासिक धरोहर है।

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