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दुनियाभर के वैज्ञानिक परेशान, सर्दी में तबाही मचायेगा कोरोना, जारी की चेतवानी कहा....

कई वैज्ञानिकों को ये आशंका है कि सर्दी के मौसम में दुनिया को कोरोना वायरस की 'सेंकेंड वेव' का सामना करना पड़ सकता है, जो पहले से 'कहीं अधिक जानलेवा' होगी.


ये पूर्वानुमान भले ही जटिल और बेहद अनिश्चित लगे, लेकिन उत्तरी गोलार्ध के देशों के लिए चिंता का सबब कहा जा रहा है. सवाल तो यही है कि सर्दी के मौसम में क्या कोरोना वायरस और कहर बरपाएगा, क्या पहले से कहीं अधिक लोग कोरोना वायरस का शिकार बनेंगे?

ये दावा है कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इनवॉयरमेंटल हेल्थ साइंसेज़ डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर मिकेला मार्टिनेज़ का जो बदलते मौसम के साथ किसी वायरस के स्वरूप में आने वाले बदलावों का वैज्ञानिक अध्ययन करती हैं.

मिकेला मार्टिनेज़ का मानना है कि संक्रामक रोगों के ग्राफ में सालभर उतार-चढ़ाव आता रहता है.

वो कहती हैं, "इंसानों में होने वाले हर संक्रामक रोग का एक ख़ास मौसम होता है. जैसे सर्दियों में फ्लू और कॉमन-कोल्ड होता है, उसी तरह गर्मियों में पोलिया और वसंत के मौसम में मीज़ल्स और चिकन-पॉक्स फैलता है. चूंकि सारे संक्रामक रोग मौसम के हिसाब से बढ़ते हैं, इसलिए ये माना जा रहा है कि कोरोना भी सर्दी में बढ़ेगा."

वैज्ञानिक इसकी दो मुख्य वजहें मानते हैं. कोरोना वायरस के संबंध में अभी तक जो प्रमाण मिले हैं, वो बताते हैं कि ह्यूमिडिटी जब बहुत अधिक होती है, कोरोना वायरस के लिए फैलना मुश्किल होता है.

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