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ड्रैगन की हालत हुई खराब, भारत के साथ आए ये सारे देश, तो खौफ में आया ड्रैगन, जानें क्या है वजह

भारत ने जापान के साथ मिलकर एक अहम कदम उठाया है। दरअसल, यह दक्षिण एशिया में ड्रैगन के प्रभाव को खत्म करने लिए उठाया गया कदम है। यह कदम चीन की विस्तारवादी नीतियों पर प्रहार करने के लिए उठाया गया है, जिस तरह वो कभी पूर्वी लद्दाख, ताइवान, भूटान देशों पर अपनी दावेदारी कर रहा है, उसकी इसी विस्तारवादी नीतियों पर कुठाराघात करने के ध्येय से यह कदम उठाया गया है। रणनीतिकारों का मानना है कि अगर ड्रैगन के विस्तारवादी नीतियों का मुकाबला कर उस पर विजयी पाना है तो सर्वप्रथम संपूर्ण एशिया को एकछत्र में आना पड़ेगा, चूंकि मौजूदा हालात में चीन के रूख से परिलक्षित है कि यह महज भारत ही नहीं अपितु समस्त एशिया और अब तो समस्त मानवजाति के लिए विपदा का सबब बन चुका है, लिहाजा किसी मुल्क के बाजाए और सभी मुल्कों के पंरिदे एक ही दरख्त के तले आ जाए तो निसंदेह ड्रैगन को सबक सिखाया जा सकता है।

उधर, अब अपने इन्हीं सब खाकों को धरातल पर उतारने की दिशा में केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सर्वप्रथम जापान के साथ मित्रता का हाथ बढ़ाया है। अब भारत और जापना एकजुट होकर अन्य एशियाई देशों के साथ हाथ मिलाने की जद्दोजहद में जुट चुके हैं। इस संदर्भ में विस्तृत बयान जारी करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और जापान ने हाल ही में सैन्य सहयोग को लेकर हस्ताक्षर किए हैं। हिंद सहित प्रशांत महासागर में जिस तरह के हालात हैं। वह इन दोनों देशों की सोच को दर्शाते हैं। फिक्की में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मत्री ने कहा कि अब समय आ चुका है कि संपूर्ण एशिया चीन की निरकुंश शैली के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करें।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह समय किसी देश को दूसरे देश से संशकित रहने का नहीं अपितु एकजुट होने का है। याद दिला दें कि उनका यह उक्त बयान ऐसी स्थिति में आया जब भारत और चीन के बीच तनाव अपने शबाब पर है। आए दिन इस तनाव को खत्म करने की दिशा में कोशिश जारी है, मगर ड्रैगन की तरफ से किसी भी प्रकार की सकारात्मक कोशिश अभी तक धरातल पर उतरती हुई नजर नहीं आ रही है।

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