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एलएसी पर भारत-चीन की सेनाएं महज कुछ दूरी पर, सीमा पर टैंक, मशीनगन और आधुनिक हथियारों का जमावड़ा

पैन्गोंग झील के दक्षिण में 07 सितम्बर से ज्यादा तनाव बढ़ा है। इसी दिन शाम 6 बजे के करीब 50 की संख्या में चीनी सैनिकों ने रणनीतिक तौर पर अहम मुखपारी चोटी से भारतीय सैनिकों को हटाने की कोशिश की थी। चीनी सैनिक रॉड, भाले और धारदार हथियारों से लैस होकर भारतीय चौकी की तरफ बढ़ रहे थे। बाद में वायरल हुईं तस्वीरों में भी साफ दिख रहा है कि चीनी सैनिकों के हाथ में धारदार हथियार हैं। भारतीय चौकी की तरफ बढ़ रहे चीनी सैनिकों को जब भारतीय सैनिकों ने रोका तब उन्होंने 10-15 राउंड फायरिंग भी की लेकिन भारतीय जवानों ने संयम बरता और उन्हें खदेड़ दिया। चीन सीमा पर 45 साल बाद यह पहला मौका था जब एलएसी पर गोली चली थी। इसी के बाद से चीन एलएसी के साथ भारतीय सशस्त्र बलों के साथ नए टकराव की तैयारी कर रहा है।



करीब पांच माह से सीमा पर चल रहे विवाद को निपटाने के लिए शनिवार को चुशुल में ब्रिगेड- कमांडर स्तर की वार्ता अनिर्णायक रही। चीन की नई वायु रक्षा प्रणाली को एलएसी के करीब तैनात किया गया है। चीनी सेना के वरिष्ठ अधिकारी 3 दिनों से एलएसी के साथ आगे के क्षेत्रों में लगातार दौरा कर रहे हैं। ब्लैक टॉप के आस-पास के क्षेत्रों में अब चीन की प्रतिक्रियात्मक तैनाती दिखाई दे रही है। भारतीय सेना की कार्रवाई के बाद चीनी सेना ने बड़े पैमाने पर स्पांजगुर गैप में सहायता शिविर लगाए हैं। पीएलए ने अपने नियंत्रण वाली ब्लैक टॉप चोटी के करीब भारतीय पोस्ट के पास अपनी नई पोस्ट बनाई है।

इस बीच सीमा पर चीन ने टाइप 15 लाइट टैंक्स, इंफैंट्री फाइटिंग व्हिकल्स, एएच4 हॉवित्जर गन्स, एचजे-12 एंटी टैंक्स गाइडेड मिसाइल्स, एनएआर-751 लाइट मशीनगन, डब्ल्यू-85 हैवी मशीनगन और एंटी-मैटेरियल स्नाइपर राइफल्स के साथ भारत को चुनौती दे रहा है। चीन ने एलएसी से लगे इलाकों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ एयरफोर्स की ताकत जुटाना शुरू कर दिया है।

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