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जल्द निकलेगी चीन की हेकड़ी, दक्षिण एशिया में खत्म होगी चीन की दादागिरी, भारत- जापान ने ड्रैगन के खिलाफ उठाया सख्त कदम,

गुरुवार को इंडस्ट्री चैंबर फिक्की  की ओर से एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और जापान के पास रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र और प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों के साथ करना करने का अवसर है। 

हमें उन क्षेत्रों के देखना होगा जहां हम मिलकर काम कर सकते है। पहला विकल्प है: रूस के सुदूर पूर्व में आर्थिक सहयोग की संभावना, क्योंकि भारत ने वहां की आर्थिक परियोजनाओं में भागीदारी को लेकर दिलचस्पी दिखाई है। दूसरा विकल्प है: प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश, जहां भारत ने अपनी विकास साझेदारी और राजनीतिक पहुंच को बढ़ाया है।

वहीं, इस कॉफ्रेंस में भारत ने जापान को सबसे भरोसेमंद और एशिया में आधुनिकीकरण का प्रेरणास्रोत बताया। विदेश मंत्री ने कहा कि मारुति क्रांति, मेट्रो क्रांति और बुलेट क्रांति जापान के इतिहास और उसकी क्षमता के चलते ही सफल संभव हो सकी। पूर्व जापानी प्रधानमंत्री आबे शिंजो और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी अच्छे रिश्ते थे। जिस वजह से दोनों देश इतने करीब आ पाए है और अब आने वाले दिनों में भी दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे। क्षेत्रीय एवं वैश्विक रणनीतिक मुद्दों के प्रति हमारी सोच बहुत मिलती-जुलती है।

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