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मरने के बाद भी बिकरू में मंडरा रहा है वकास दुबे, ग्रामीणों में दहशत, सूरज डूबते ही सन्नाटा छा जाता है, वजह जानकर पैरो तले निकल जाएगी जमीन....

रिपोर्ट के  मुताबिक, गांव के एक युवक ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि आज भी गोलियों की आवाज सुनाई देती है, कुछ लोगों ने तो विकास भैया (विकास दुबे) को देखा भी है, एक महिला ने दावा किया कि कई बार हमने खंडहर में लोगों को किसी बात पर चर्चा करते हुए सुना है, हालांकि आवाज साफ सुनाई नहीं दी. बीच में थोड़ा हंसी-मजाक भी चलने का आभास हुआ. यह काफी हद तक वैसा ही था, जैसा विकास के जिंदा रहने के दौरान घर में होता था.



दहशत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही सूरज डूबता है, बिकरू गाँव के लोग जल्दी-जल्दी अपने घर लौटने लगते हैं और घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं, अब पहले की तरह लोग दिन में या शाम को बैठकर बातें नहीं करते हैं. सूरज डूबते ही एक भयानक सन्नाटा बिकरू को घेर लेता है, गौरतलब है कि बिकरू गाँव में हाल के दिनों में सबसे भायवह खूनखराबा वाला मंजर देखा था.

स्थानीय लोगों ने दबी जुबान में दावा किया कि उन्होंने अक्सर विकास दुबे को उसके घर के खंडहर में बैठा देखा है.एक बुजुर्ग ने दावा किया, "हमने उसे वहां बैठे और मुस्कुराते हुए देखा है। यह कुछ ऐसा है जैसे वह हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है।

विकास दुबे व् उसके अन्य साथियों के एनकाउंटर के बाद बिकरू गांव में चार पुलिसकर्मी जिसमें दो पुरुष और दो महिलाएं तैनात हैं. उनमें से किसी ने भी रिकॉर्ड पर, गोलियों की आवाज सुनने या या विकास दुबे को देखने की बात नहीं स्वीकारी. उनमें से एक ने कहा, हमें अपनी ड्यूटी करने में कोई दिक्कत नहीं है.

एक स्थानीय पुजारी का कहना है कि स्थानीय लोगों के दावों को खारिज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, "ऐसे मामलों में जहां अकाल मृत्यु हुई होती हैं, ऐसी घटनाएं होती हैं।

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