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कोलकाता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला कोरोना से हुई मौतों में परिवार को मिले दाह संस्कार का अधिकार

कोर्ट (Court) ने नई गाइडलाइन तय करते हुए कहा कि अगर शव परीक्षण नहीं किया जाना है तो उसे तुरंत परिवार को सौंप दिया जाना चाहिए, इस दौरान शव को बॉडी बैग में रखा जाना चाहिए. चेहरे की ओर बैग का हिस्सा पारदर्शी होना चाहिए. ध्यान रहे कि बैग बाहर से अच्छी तरह से साफ किया गया हो.



इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिए कि बॉडी बैग का मुंह वाला हिस्सा श्मशान या कब्रिस्तान में जाकर खोला जा सकता है, जिससे परिजन शव (Dead Body) के अंतिम दर्शन कर सकें. शव पर धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रों का पाठ, पवित्र जल का छिड़काव सब किया जा सकेगा. हालांकि शव को छूने की अनुमति किसी को नहीं होगी.

परिवार (Fmaliy) के सदस्यों को शव के दाह संस्कार के बाद खुद की अच्छी तरह से साफ-सफाई करनी होगी. साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि शव को मृतक के घर नहीं ले जाया जा सकेगा, शव को अस्पताल से सीधे श्मशान या कब्रिस्तान में ही ले जाना होगा.
जो लोग लाश को ढोते हैं, उन्हें मास्क और दस्ताने पहनने होंगे और बाद में खुद को सैनिटाइज भी करना होगा. शवयान पूरी तरह से कीटाणुरहित होना चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि श्मशान और कब्रिस्तान कर्मचारियों को संक्रमण के बारे में जागरुक करना भी जरूरी है. उन्हें भी सभी जरूरी सुरक्षा लेनी होगी.

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