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ये है हिमाचल का अनोखा मंदिर, जहां सैनिकों की रक्षा के लिए खुद पहुंच जाती है मां, वजह जानकर रह जाओगे दंग

ये है मंदिर की कहानी मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस मंदिर को लेकर एक सच्ची कहानी है कि माता हमारे पुरखों के साथ यहां पर चौसर खेला करती थी। माता हर दिन इस मंदिर में आती थी। एक दिन अचानक चौसर खेलते खेलते माता ने पुजारी से कहा कि उन्हें कहीं जाना है और अब वह थोड़ी देर में वापस आएंगी और इतना कहकर माता अचानक वहां से गायब हो गई। सब लोग वहां पर माता का इंतजार करते रहे।

जब माता मंदिर में वापस आईं तो पुजारी ने पूछा कि देवी आप कहां गई थी जिस पर माता ने कहा कि मैं आपको यह तो बता दूंगी कि मैं कहां गई थी लेकिन यह बताने के बाद मुझे इस मंदिर से हमेशा के लिए जाना होगा और फिर मैं यहां पर मूर्ति रुप में स्थापित रहूंगी अन्यथा मैं जैसे इस मंदिर में लगातार आती हूं बैसे आती रहुंगी। 

पंडित अपनी जिद पर अड़ा रहा और उसने माता से पूछा कि नहीं आप बताइए कि आप कहां गई थी इस पर फिर माता ने पंडित को अपने हाथों में डाला हुआ चूड़ा दिखाया जो पूरी तरह भीगा हुआ था और उस पर रेत के कुछ कंण भी दिखाई दे रहे थे तो पुजारी ने पूछा कि माता यह क्या हुआ है।इस पर माता ने बताया कि उनके कुछ भगत जो भारत माता की रक्षा करते हैं वह हिंद महासागर में पानी में डूब रहे थे और उन्होंने मुझे अचानक याद किया तो फिर मैं उनके पास गई और उनकी परोक्ष रूप से सहायता कर उन्हें इस विपदा से निकाला।

मूर्ति रुप में स्थापित है मां चामुंडा: माता ने कहा कि अब जब आपने मुझसे जाने का कारण पूछ लिया है तो अब मुझे भी इस मंदिर से हमेशा के लिए जाना होगा और अब मैं इस मंदिर में मूर्ति रुप में स्थापित रहूंगी। लेकिन देश के सैनिक मेरी पूजा के लिए हमेशा यहां भी आते रहेंगे और बाकी जगह भी चामुंडा माता के नाम से मेरी पूजा होती रहेगी। यह कहकर माता इस मंदिर से चली गई और उसके बाद माता की मूर्ति में उनका चेहरा भी दाएं तरफ की ओर घूम गया।

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