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LAC की सर्दी : भारतीय जवान पूरी कर चुके हैं तैयारी, दूसरी ओर लगभग सरेंडर कर चुके हैं चीनी 'बच्चे'

खबरों के मुताबिक मास्को शिखर सम्मेलन के बाद से चीन द्वारा लद्दाख-तिब्बत क्षेत्र में किसी तरह की आक्रमक गतिविधि नहीं हुई है जिस कारण जानकार इसे चीन की सरेंडर नीति भी बता रहे हैं। उनका मानना है चीन अब बैकफुट पर है और वो इस पूरे मामले में भारत के हाथों घिरता दिख रहा है। यही चीन शिखर सम्मेलन से पहले लगातार पैंगोग के इलाकों में 100-200 शॉट्स फायर कर रहा था जबकि अब स्थितियां बिल्कुल विपरीत हो गई है।


रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने अपने चीनी समकक्ष से मास्को में बातचीत के दौरान साफ कह दिया था कि सीमा पर हो रही आक्रमकता के लिए पीपल्स लिबरेशन आर्मी जिम्मेदार है जो लगातार भारत में घुसपैठ की कोशिशें कर रही है वहीं, रक्षामंत्री भारतीय संसद में इस मुद्दे पर चीन को उसके किए हुए कुकर्मों से रूबरू करा चुके हैं।

इस मामले में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात कर गतिरोध कम करने के लिए पांच सूत्री कार्यक्रम के प्रस्ताव का समर्थन किया है। इन स्थितियों की बदौलत ही अब भारत चीन को खामोश करने में सक्षम हुआ है।

चीन अभी शांत है.पर बाद का पता नहीं। इसीलिए भारतीय सेना ने पूरे इलाके में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। सैन्य तैनाती तो पहले से ही ज्यादा है जिनकी संख्या करीब 20-30 हजार है। हालांकि, इसको लेकर सेना कोई आधिकारिक बयान नहीं दे रही है। लेकिन ठंड के मौसम को देखते हुए चीन के धोखाधड़ी वाले बहुचर्चित रवैए को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।
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