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UN में जमकर बोले मोदी जी, प्रधानमंत्री ने कहा- जब भारत मजबूत था तो किसी को सताया नहीं; जब मजबूर था, तब किसी पर बोझ नहीं बना, कोरोना को लेकर दिया बड़ा संदेश


मोदी ने कहा कि 1945 की दुनिया आज से एकदम अलग थी। साधन, संसाधन सब अलग थे। ऐसे में विश्व कल्याण की भावना के साथ जिस संस्था का गठन हुआ, वो भी उस समय के हिसाब से ही थी। आज हम बिल्कुल अलग दौर में हैं। 21वीं सदी में हमारे वर्तमान की, भविष्य की आवश्यकताएं और चुनौतियां अलग हैं। आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तबकी परिस्थतियों में हुआ था, वह आज भी प्रासंगिक है। सब बदल जाए और हम ना बदलें तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है।

मोदी ने कहा, '75 साल में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों को मूल्यांकन करें, तो तमाम उपलब्धियां हैं। लेकिन, कई उदाहरण हैं, जो गंभीर आत्ममंथन की आ‌वश्यकता खड़ी करते हैं। कहने को तो तृतीय विश्वयुद्ध नहीं हुआ। पर अनेकों युद्ध हुए, गृह युद्ध हुए, आतंकी हमलों ने दुनिया को थर्रा कर रख दिया, खून की नदियां बहती रहीं। इन हमलों में जो मारे गए, वो हमारे आपकी तरह इंसान ही थे। वो लाखों मासूम बच्चे, जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़कर चले गए। कितने ही लोगों को अपने जीवन भर की पूंजी गंवानी पड़ी, घर छोड़ना पड़ा। आज ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे।'

'कोरोना से दुनिया 8-9 महीने से संघर्ष कर रहा है। इस महामारी से निबटने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रभावशाली नेतृत्व कहां था। संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था, प्रक्रिया में बदलाव आज समय की मांग है। इस संस्था पर जो अटूट विश्वास है भारत का वो बहुत कम देशों में मिलेगा। लेकिन, यह भी सच्चाई है कि भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के रिफॉर्म को लेकर चल रही प्रॉसेस के पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।'

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